विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म की शास्त्रीय एवं आगम परंपरा में 'नवरात्रि' केवल एक सामान्य पर्व या उत्सव मात्र नहीं है, अपितु यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) के साथ मानवीय चेतना के तादात्म्य को स्थापित करने वाला एक अत्यंत सूक्ष्म, वैज्ञानिक और तांत्रिक अनुष्ठान है।
घटस्थापना के माध्यम से साधक पञ्चमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को एक विशिष्ट अनुपात में संतुलित करता है और निर्गुण, निराकार, अवाङ्मनसगोचर परब्रह्म की महाशक्ति को एक सगुण, साकार रूप (कलश) में आवाह्न कर प्रतिष्ठित करता है।
शक्ति-उपासना के इस पावन अवसर पर अनुष्ठान का सर्वाधिक महत्वपूर्ण, आधारभूत और रहस्यमयी कर्म 'कलश स्थापना' या 'घटस्थापना' है।
इन तत्वों के संपूर्ण और शास्त्रसम्मत सामंजस्य से कलश नव-दिनों के लिए ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक अजेय और स्पंदित 'पावरहाउस' बन जाता है। नौ दिनों की पूजा के पश्चात् यह ऊर्जाकृत जल अत्यंत पवित्र हो जाता है और शरीर, मन तथा घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए इसका मार्जन (छिड़काव) किया जाता है।





