विस्तृत उत्तर
कलश स्थापना की विधि देवी भागवत पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:
कलश स्थापना की सामग्री
- ▸तांबे या मिट्टी का कलश
- ▸शुद्ध जल (गंगाजल सहित)
- ▸पंचपल्लव (आम, पीपल, बरगद, गूलर, अशोक के पत्ते)
- ▸सुपारी, सिक्का, अक्षत
- ▸नारियल
- ▸आम के पत्ते (5 या 7)
- ▸लाल कपड़ा
स्थापना की विधि
1स्थान
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में, लाल कपड़े पर।
2कलश में डालें
- ▸सुपारी
- ▸सिक्का
- ▸अक्षत
- ▸जल
- ▸गंगाजल
3आम पत्ते
कलश के मुख पर 5 या 7 आम पत्ते लगाएं।
4नारियल
नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें, कलश के ऊपर रखें।
5कलश स्थापना मंत्र
> 'कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।
> मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः।
> कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुंधरा।
> ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदोऽप्यथर्वणः।
> अंगैश्च सहिताः सर्वे कलशं तु समाश्रिताः।'
6आवाहन
'कलशे आवाहयामि देवीं/देवम्'





