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पूजा विधि📜 देवी भागवत पुराण — कलश स्थापना, धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश1 मिनट पठन

पूजा में कलश कैसे स्थापित करें?

संक्षिप्त उत्तर

कलश स्थापना: ईशान कोण में, लाल कपड़े पर। कलश में: सुपारी, सिक्का, अक्षत, जल-गंगाजल। मुख पर 5-7 आम पत्ते। ऊपर नारियल। मंत्र: 'कलशस्य मुखे विष्णुः, कण्ठे रुद्रः...' नवरात्रि में कलश में देवी का आवाहन — यह देवी का अस्थायी निवास।

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विस्तृत उत्तर

कलश स्थापना की विधि देवी भागवत पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:

कलश स्थापना की सामग्री

  • तांबे या मिट्टी का कलश
  • शुद्ध जल (गंगाजल सहित)
  • पंचपल्लव (आम, पीपल, बरगद, गूलर, अशोक के पत्ते)
  • सुपारी, सिक्का, अक्षत
  • नारियल
  • आम के पत्ते (5 या 7)
  • लाल कपड़ा

स्थापना की विधि

1स्थान

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में, लाल कपड़े पर।

2कलश में डालें

  • सुपारी
  • सिक्का
  • अक्षत
  • जल
  • गंगाजल

3आम पत्ते

कलश के मुख पर 5 या 7 आम पत्ते लगाएं।

4नारियल

नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें, कलश के ऊपर रखें।

5कलश स्थापना मंत्र

> 'कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।

> मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः।

> कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुंधरा।

> ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदोऽप्यथर्वणः।

> अंगैश्च सहिताः सर्वे कलशं तु समाश्रिताः।'

6आवाहन

'कलशे आवाहयामि देवीं/देवम्'

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शास्त्रीय स्रोत
देवी भागवत पुराण — कलश स्थापना, धर्म सिंधु, नित्यकर्म पूजा प्रकाश
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