विस्तृत उत्तर
शाम को (चंद्रोदय के समय) एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर कलश और गणेश जी की स्थापना करें। भगवान को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से स्नान कराएं। इसके बाद लाल चंदन, अक्षत, लाल फूल (गुलाब/गुड़हल) और विशेष रूप से 21 दूर्वा (घास) 'ॐ गं गणपतये नमः' बोलते हुए चढ़ाएं। अंत में 21 मोदक का भोग लगाकर आरती करें।





