विस्तृत उत्तर
नवरात्रि का प्रारंभ कलश (घट) स्थापना से होता है। यह नवरात्रि का सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कार है।
शुभ मुहूर्त
- ▸प्रतिपदा तिथि (नवरात्रि का पहला दिन)
- ▸अभिजित मुहूर्त (मध्यान्ह) या प्रातःकाल
- ▸किसी ज्योतिषी से सटीक मुहूर्त निकलवाएं
सामग्री
- ▸मिट्टी या तांबे का कलश
- ▸गंगाजल या शुद्ध जल
- ▸आम के 5 पत्ते (पल्लव)
- ▸नारियल (जटा सहित)
- ▸मोली (लाल धागा)
- ▸अक्षत, सुपारी, सिक्का
- ▸मिट्टी और जौ के बीज (अखंड ज्योति हेतु)
- ▸लाल वस्त्र
कलश स्थापना की विधि
- 1मिट्टी तैयार करें: पूजा स्थान पर थोड़ी मिट्टी फैलाएं और उसमें जौ के बीज बोएं — ये बीज नवरात्रि में अंकुरित होते हैं जो शुभता का प्रतीक है।
- 1कलश सजाएं:
- ▸कलश को धोकर शुद्ध करें
- ▸कलश में गंगाजल भरें
- ▸सिक्का, सुपारी, अक्षत, एक पान का पत्ता डालें
- ▸कलश के गले पर मोली बांधें
- 1आम के पत्ते: पाँच आम के पत्ते कलश के मुख पर रखें (वृत्ताकार)
- 1नारियल स्थापन: जटा सहित नारियल पर लाल वस्त्र लपेटकर, मोली बांधकर कलश के ऊपर रखें — नारियल शिर देवी की प्रतीक है।
- 1स्थापना स्थान: उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में, दुर्गा प्रतिमा के दाईं ओर कलश रखें।
- 1मंत्र:
> ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः।
> मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः।
- 1अखंड ज्योति: यदि संभव हो तो घी का दीप प्रज्वलित करें जो पूरे नवरात्रि जलता रहे।
नवरात्रि के अंत में
दशमी (विजयादशमी) के दिन कलश विसर्जन करें — जल किसी नदी या पवित्र स्थान में प्रवाहित करें।





