विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार सत्यनारायण पूजा के लिए एक पवित्र 'मंडप' का निर्माण किया जाता है। इसके चारों कोनों पर केले के खंभे (Banana Stems) लगाए जाते हैं, क्योंकि 'केला' उर्वरता (Fertility) और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इसके मध्य में तांबे या मिट्टी के कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखकर 'कलश स्थापना' की जाती है। यह कलश संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है और जल तत्व की शुद्धि के लिए इसमें 'वरुण देव' का आवाहन किया जाता है।
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