नवदुर्गाचंद्रघंटा माता की पूजा में घंटी बजाने का क्या महत्व है?माथे पर चंद्र+घंटा = घंटी बजाना = आवाहन। दुष्ट शक्ति नाश (युद्ध में राक्षस भयभीत)। 'ॐ' अनुगूंज। दिन 3, भोग: दूध, रंग: स्लेटी। 'ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः'।#चंद्रघंटा#घंटी#तीसरी
दुर्गा सप्तशतीदुर्गा सप्तशती पाठ के नौ दिन क्रम से कौन से अध्याय पढ़ें?दिन 1: अध्याय 1 (मधु-कैटभ)। दिन 2: अ.2-3। दिन 3: अ.4। दिन 4: अ.5। दिन 5: अ.6। दिन 6: अ.7 (चंड-मुंड)। दिन 7: अ.8 (रक्तबीज)। दिन 8: अ.9-10 (शुम्भ-निशुम्भ)। दिन 9: अ.11-13 (वरदान+फल)।
नवरात्रिनवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने का नियम क्या है — बुझ जाए तो क्या करें?घी/तेल, 9 दिन निरंतर, हवा से बचाव। प्रतिदिन घी डालें। बुझ जाए: तुरंत पुनः जलाएं + क्षमा प्रार्थना + मंत्र 3 बार। देवी नाराज नहीं — भक्ति प्रधान।#अखंड ज्योति#नियम#बुझना
नवरात्रिचैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में पूजा का क्या अंतर है?चैत्र: वसंत, नववर्ष, सौम्य देवी, राम नवमी। शारदीय: शरद, उग्र देवी, दशहरा/रावण दहन, बंगाल दुर्गा पूजा। पूजा विधि समान — घटस्थापना, 9 दिन, सप्तशती।#चैत्र#शारदीय#अंतर
त्योहारकन्या पूजन किस उम्र की कन्याएँ?2-10 वर्ष(सर्वमान्य), रजस्वला पूर्व। 2=कुमारी, 3=त्रिमूर्ति...9=दुर्गा, 10=सुभद्रा। सर्वोत्तम 2-9। भाव प्रधान। कन्या प्रसन्न=देवी प्रसन्न।#कन्या पूजन#उम्र#नवरात्रि
मंत्र साधनानवार्ण मंत्र सिद्ध करने का तरीकानवार्ण मंत्र ('ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे') को सिद्ध करने के लिए नवरात्रि के नौ दिनों में पूर्ण ब्रह्मचर्य के साथ लाल आसन पर सवा लाख जप कर अंत में दशांश हवन करना चाहिए।#नवार्ण मंत्र#दुर्गा#सिद्धि
मंत्र साधनाशीघ्र विवाह के लिए कात्यायनी मंत्र साधनाशीघ्र और सुयोग्य विवाह के लिए शाम के समय लाल वस्त्र पहनकर माता कात्यायनी के मंत्र 'कात्यायनि महामाये...' का लाल चंदन की माला से 108 बार जप करना अचूक उपाय है।#विवाह#कात्यायनी#शीघ्र विवाह
दुर्गा मंत्रनवार्ण मंत्र का जप नवरात्रि में कैसे करें?प्रतिपदा संकल्प। 108/दिन (न्यूनतम), 1008 उत्तम, ~13,889 (सवा लाख/9 दिन)। लाल आसन, स्फटिक माला। सप्तशती: कवच→अर्गला→कीलक→नवार्ण→अध्याय। नवमी: हवन+कन्या पूजन।#नवार्ण#नवरात्रि#जप
नवदुर्गामहागौरी माता की पूजा से सौभाग्य कैसे बढ़ता है?गौरी = पार्वती (शिव तपस्या) = सौभाग्य देवी। श्वेत = शुद्धता → पाप नाश → सौभाग्य। दाम्पत्य सुख, मनचाहा वर। दिन 8, भोग: नारियल, रंग: गुलाबी। 'ॐ देवी महागौर्यै नमः'।#महागौरी#सौभाग्य#आठवीं
पूजा विधिमहामाया की पूजा कैसे करते हैं?महामाया पूजा: दुर्गा या काली रूप में। नवरात्रि अष्टमी-नवमी = दुर्गा सप्तशती मंत्रों से। दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय पाठ (योगनिद्रा महिमा)। 'दुर्गे समस्यात्मिका जगन्माता महामाया' मंत्र से वंदना। भक्तभाव = सरल हृदय से पुकारना।#महामाया पूजा#दुर्गा काली रूप#नवरात्रि
फलश्रुतिनवरात्रि पूजा से कुंडलिनी जागरण कैसे होता है?नवरात्रि में कुंडलिनी जागरण: कलश + अखंड ज्योति की ऊर्जा में नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' का जप → मूलाधार में सुप्त कुंडलिनी जाग्रत → षट्चक्रों का भेदन → चेतना का ऊर्ध्वरोहण → अंततः मोक्ष।#कुंडलिनी जागरण#नवार्ण मंत्र#षट्चक्र
नवदुर्गा मंत्रनवरात्रि के 9 दिनों की 9 देवियों के मंत्र क्या हैं?नवदुर्गा मंत्र: दिन 1 = ह्रीं श्रीं शैलपुत्र्यै नमः; 2 = ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः; 3 = चन्द्रघण्टायै; 4 = कूष्माण्डायै; 5 = स्कन्दमातायै; 6 = कात्यायन्यै; 7 = कालरात्र्यै; 8 = महागौर्यै; 9 = सिद्धिदात्र्यै नमः।#नवदुर्गा मंत्र#9 देवियाँ#बीज मंत्र
नवरात्रि और कलश स्थापना परिचयनवरात्रि में कलश स्थापना क्यों करते हैं?कलश स्थापना = पंचमहाभूतों को संतुलित कर निर्गुण परब्रह्म की महाशक्ति को सगुण-साकार रूप में आवाह्न करना। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ मानवीय चेतना का तादात्म्य स्थापित करने का वैज्ञानिक और तांत्रिक अनुष्ठान है।#कलश स्थापना#नवरात्रि#घटस्थापना
नवरात्रि और उपासनानवरात्रि का क्या महत्व है?नवरात्रि (चैत्र और आश्विन): केवल सामान्य पर्व नहीं। देवी भागवत पुराण और तंत्र-आगम: ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) के साथ मानवीय चेतना का तादात्म्य स्थापित करने वाला अत्यंत सूक्ष्म, वैज्ञानिक और तांत्रिक अनुष्ठान। ऋतु-परिवर्तन और ब्रह्मांडीय शक्तियों के जागरण का काल।#नवरात्रि#ब्रह्मांडीय ऊर्जा#तांत्रिक अनुष्ठान
स्तोत्र पाठ विधि और नियमअर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए कौन सा दिन सबसे शुभ है?अर्धनारीश्वर स्तोत्र के लिए सोमवार सबसे शुभ दिन है। इसके अलावा नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर भी यह स्तोत्र विशेष फल देता है।#सोमवार#नवरात्रि#महाशिवरात्रि
धार्मिक अंतरमासिक दुर्गाष्टमी और नवरात्रि की महाष्टमी में क्या अंतर है?मासिक अष्टमी हर महीने आने वाली सरल और व्यक्तिगत पूजा है। जबकि महाष्टमी (नवरात्रि) साल में दो बार आने वाला बड़ा उत्सव है जिसमें 'संधि पूजा' और 9 कन्याओं का पूजन अनिवार्य होता है।#महाष्टमी#नवरात्रि#तुलनात्मक विश्लेषण
वेद एवं शास्त्रदेवीसूक्त पाठ का सही समयदेवीसूक्त पाठ का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त है। नवरात्रि के नौ दिन, अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी तिथियों पर पाठ विशेष फलदायी है। स्नान के बाद पूर्वमुख बैठकर शुद्ध मन से पाठ करें।#देवीसूक्त#पाठ समय#देवी उपासना
पर्वनवरात्रि के दसवें दिन विजयादशमी मनाने का क्या कारण हैविजयदशमी (10वाँ): दुर्गा ने 9 दिन युद्ध → 10वें महिषासुर वध। राम ने 9 दिन शक्ति पूजा → 10वें रावण वध। 9=साधना/शक्ति, 10=विजय/फल। अबूझ मुहूर्त, शस्त्र पूजा, नया कार्य।#विजयदशमी#नवरात्रि#दशहरा
त्योहार पूजानवरात्रि में ज्वारा क्यों उगाते हैं इसका प्रतीकात्मक अर्थ?ज्वारा: शक्ति/सृष्टि प्रतीक (बीज→अंकुर=देवी), समृद्धि शकुन (हरे=शुभ), 9 दिन=नवजीवन (आत्मा नवीनीकरण), कृषि कृतज्ञता, कलश अंग (देवी आसन)। नवमी=प्रसाद। टोपी में लगाएँ/नदी विसर्जन।#ज्वारा#नवरात्रि#जौ
तंत्र साधनातंत्र में नवरात्रि विशेष साधना कैसे करेंतांत्रिक नवरात्रि: गुरु दीक्षा → घटस्थापना + यंत्र → 9 दिन: न्यास → ध्यान → मंत्र जप (108/1008) → सप्तशती पाठ → नवदुर्गा बीज मंत्र। उन्नत: दश महाविद्या/श्रीविद्या/नवार्ण अनुष्ठान। अष्टमी-नवमी हवन। सामान्य भक्त: सप्तशती + नवदुर्गा पूजन = सुरक्षित। गुरु अनिवार्य।#नवरात्रि#तंत्र#शक्ति
देवी उपासनानवरात्रि में घर में कौन सा यंत्र स्थापित करेंनवरात्रि यंत्र: श्रीयंत्र (सर्वश्रेष्ठ — धन/समृद्धि), दुर्गा बीसा (शत्रुनाश), नवदुर्गा यंत्र, महाकाली, बगलामुखी (कोर्ट/शत्रु)। लाल कपड़े पर, गंगाजल शुद्धि, नित्य पूजा। गुरु मार्गदर्शन अनिवार्य — बिना प्राण प्रतिष्ठा निष्प्रभ। बाज़ारी की प्रामाणिकता जाँचें।#नवरात्रि#यंत्र#श्रीयंत्र
देवी उपासनानवरात्रि में घट स्थापना के बाद कलश गिर जाए तो क्या करेंकलश गिरे तो: (1) उठाएँ, शुद्ध करें। (2) पुनः जल + गंगाजल + सामग्री भरकर मंत्रपूर्वक स्थापित। (3) 'ॐ नमश्चण्डिकायै' 108 बार + गायत्री 108 + क्षमा प्रार्थना। (4) टूटे तो नया कलश। (5) व्रत जारी रखें — भंग नहीं। माँ कृपालु हैं, श्रद्धा प्रधान।#नवरात्रि#कलश#घटस्थापना
देवी उपासनादुर्गा मां के नौ रूपों की अलग अलग आरती क्या हैनवदुर्गा आरतियाँ: प्रत्येक दिन विशिष्ट — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री। सर्वव्यापी: 'जय अम्बे गौरी' सभी दिन मान्य। ये भक्ति रचनाएँ हैं — क्षेत्र अनुसार भिन्नता।#नवदुर्गा#आरती#नवरात्रि
देवी उपासनानवरात्रि में उपवास के दौरान नमक खा सकते हैं या नहींनवरात्रि नमक: सामान्य नमक = अधिकांश परम्पराओं में वर्जित। सेंधा नमक (Rock Salt) = मान्य और शुभ (आयुर्वेद: सैन्धव सर्वोत्तम)। कठोर व्रत = कोई नमक नहीं। व्रत आहार: कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना, आलू, दूध, फल, मखाने। क्षेत्र/कुलाचार अनुसार भिन्नता।#नवरात्रि#उपवास#नमक
देवी उपासनानवदुर्गा के नौ रूपों के बीज मंत्र क्या हैंनवदुर्गा बीज मंत्र: (1) शैलपुत्री: ॐ ह्रीं..., (2-9) क्रमशः प्रत्येक रूप का विशिष्ट मंत्र (ऐं/ह्रीं/क्लीं बीजाक्षर)। प्रतिदिन 108 जप। सार्वभौमिक: नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। गुरु प्राप्त मंत्र सर्वोत्तम। पाठभेद सम्भव।#नवदुर्गा#बीज मंत्र#नवरात्रि
देवी उपासनानवरात्रि में कन्या भोज में क्या क्या बनाना चाहिएकन्या भोज: पूड़ी + हलवा + काले चने (सबसे पारम्परिक) + खीर। अन्य: दही-भल्ले, पनीर, मिठाई, फल। सात्विक — प्याज-लहसुन वर्जित। 9 कन्या (2-10 वर्ष) + 1 लांगुर। पैर धोएँ → तिलक → चुनरी/वस्त्र → भोजन → चरण स्पर्श → दक्षिणा।#नवरात्रि#कन्या भोज#कन्या पूजन
देवी उपासनानवरात्रि में देवी को भोग में क्या क्या लगाएंनवरात्रि भोग: दिन अनुसार — घी, मिश्री, खीर, मालपूआ, केला, शहद, गुड़, नारियल, तिल। सामान्य: हलवा-पूड़ी, फल, पंचामृत, मिठाई, बताशे, दूध। सात्विक — प्याज-लहसुन-माँस वर्जित। शुद्ध मन से तैयार, तुलसी पत्र रखें।#नवरात्रि#भोग#देवी
देवी उपासनादुर्गा पूजा में अष्टमी और नवमी में हवन कैसे करेंअष्टमी/नवमी हवन: हवनकुण्ड → अग्नि प्रज्वलन → नवग्रह आहुति → सप्तशती मंत्रों से आहुति + 'स्वाहा' → नवार्ण मंत्र 108 आहुति → नवदुर्गा नाम आहुति → पूर्णाहुति (नारियल + वस्त्र)। कुलाचार अनुसार अष्टमी या नवमी। कन्या भोज + ब्राह्मण भोजन।#दुर्गा पूजा#अष्टमी#नवमी
त्योहार पूजानवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।#नवरात्रि#कलश स्थापना#घटस्थापना
पर्वनवरात्रि में ज्वारा बोने की विधि क्या हैनवरात्रि ज्वारा: प्रतिपदा को घटस्थापना के साथ — मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी + जौ/गेहूँ बीज → जल छिड़कें → 9 दिन अँधेरे में (सुबह-शाम जल) → 5-7 इंच अंकुर → नवमी/दशमी को निकालें → प्रसाद (कान पर लगाएँ) + विसर्जन। ज्वारा = शक्ति जागृति, सौभाग्य प्रतीक।#नवरात्रि#ज्वारा#घटस्थापना
हवन एवं यज्ञनवचंडी हवन कैसे करवाएंनवचंडी हवन: 9 दिन प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती पाठ + दशांश हवन। विधि: संकल्प → गणपति पूजन → कलश स्थापना → सप्तशती पाठ → नवार्ण मंत्र जप → हवन → कुमारी पूजन → पूर्णाहुति। नवरात्रि में सर्वोत्तम। अनुभवी पण्डित से करवाएँ। ग्रह दोष, शत्रु भय नाश, मनोकामना पूर्ति।#नवचंडी#हवन#दुर्गा सप्तशती
मंत्र सिद्धिदुर्गा मंत्र सिद्धि कैसे करें?नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' (9 अक्षर = 9 लाख पुरश्चरण) — सर्वश्रेष्ठ। नवरात्रि, मंगलवार, अष्टमी-नवमी। लाल वस्त्र, रुद्राक्ष माला। दुर्गा सप्तशती = 1 लाख मंत्र तुल्य। भोग: लाल गुड़हल, नारियल। सिद्धि: निर्भयता और सिंह-स्वप्न।#दुर्गा मंत्र#नवरात्रि#सिद्धि विधि
साधना समयतंत्र साधना के लिए कौन सा समय सही है?तंत्र का सही समय: निशीथ काल (रात 12 बाद — सर्वश्रेष्ठ)। तिथि: अमावस्या (काली-भैरव), पूर्णिमा (देवी), चतुर्दशी (शिव)। विशेष: नवरात्रि, शिवरात्रि, दीपावली। कुलार्णव: नित्यता — शुभ काल से भी अधिक महत्वपूर्ण।#समय#निशीथ#अमावस्या
साधना अवधितंत्र साधना कितने दिन करनी चाहिए?तंत्र साधना अवधि: नवरात्रि (9 रात — सर्वश्रेष्ठ), 11 रात, 41 दिन (परिपक्वता), पुरश्चरण (जप पूर्ण होने तक)। नित्य — आजीवन। नियम: शुरू की साधना पूरी करें। 'नित्यं सिद्धिकरी क्रिया।'#कितने दिन#अवधि#नवरात्रि
तंत्र प्रारंभतंत्र साधना कब शुरू करनी चाहिए?तंत्र कब शुरू: पात्रता — श्रद्धा, धैर्य, शुद्ध उद्देश्य। शुभ: नवरात्रि (सर्वश्रेष्ठ), शिवरात्रि (भैरव), अमावस्या (काली)। समय: ब्रह्ममुहूर्त या निशीथ काल (रात्रि 12 बाद)। क्रोध/लोभ/बदले की भावना से कभी नहीं।#कब शुरू#समय#पात्रता
पूजा विधिपूजा में कलश कैसे स्थापित करें?कलश स्थापना: ईशान कोण में, लाल कपड़े पर। कलश में: सुपारी, सिक्का, अक्षत, जल-गंगाजल। मुख पर 5-7 आम पत्ते। ऊपर नारियल। मंत्र: 'कलशस्य मुखे विष्णुः, कण्ठे रुद्रः...' नवरात्रि में कलश में देवी का आवाहन — यह देवी का अस्थायी निवास।#कलश स्थापना#विधि#नवरात्रि
साधना प्रारंभकाली साधना कब शुरू करनी चाहिए?काली साधना आरंभ के शुभ काल: शारद नवरात्रि (सर्वोत्तम), दीपावली की रात (महाकाल), अमावस्या, कालाष्टमी। वार: शनिवार या मंगलवार। भक्ति मार्ग किसी भी शुक्ल पक्ष के शुभ दिन शुरू करें — श्रद्धा और संकल्प पर्याप्त है।#काली साधना आरंभ#शुभ मुहूर्त#अमावस्या
साधना समयतंत्र साधना के लिए कौन सा समय सही है?तंत्र साधना का श्रेष्ठ समय: रात्रि के तृतीय प्रहर (निशीथ — केवल दीक्षित), ब्रह्ममुहूर्त (भक्ति साधना — सबके लिए), प्रदोष। अमावस्या की रात और शारद नवरात्रि — वार्षिक महाकाल। सामान्य साधक ब्रह्ममुहूर्त चुनें।#तंत्र समय#रात्रि#अमावस्या
साधना समयतंत्र साधना कब करनी चाहिए?तंत्र साधना के श्रेष्ठ काल: निशीथ (रात 11:30-12:30 — केवल दीक्षित), ब्रह्ममुहूर्त (भक्ति साधना — सबके लिए), प्रदोष (शांत साधना)। अमावस्या और शारद नवरात्रि सर्वोत्तम वार्षिक काल। सामान्य साधक ब्रह्ममुहूर्त चुनें।#तंत्र साधना समय#निशीथ#अमावस्या
पूजा सामग्रीदुर्गा जी को कौन सा भोग चढ़ाया जाता है?दुर्गा को प्रिय भोग: खीर (सर्वोत्तम), हलवा-पूरी-काला चना (नवरात्रि में), पंचमेवा, फल। नवदुर्गा का प्रत्येक दिन अलग भोग है — दिन 1 घी, दिन 3 खीर, दिन 5 केला, दिन 9 तिल। भोग सदा सात्विक, ताजा और प्याज-लहसुन रहित।#दुर्गा भोग#नैवेद्य#हलवा
नवरात्रि विधिनवरात्रि में कन्या पूजन क्यों किया जाता है?कन्या में देवी का अंश होता है — 1-9 वर्ष की कन्याएं नवदुर्गा के नौ रूपों की प्रतीक हैं। अष्टमी या नवमी को 2-10 कन्याओं के चरण धोएं, तिलक लगाएं, हलवा-पूरी-चना भोजन कराएं और दक्षिणा दें। कन्या पूजन से सभी देवता प्रसन्न होते हैं।#कन्या पूजन#कुमारी पूजन#नवरात्रि
देवी ज्ञाननवदुर्गा के नाम क्या हैं?नवदुर्गा के नाम (देवी कवच): 1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघंटा 4. कूष्मांडा 5. स्कंदमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिद्धिदात्री। नवरात्रि के नौ दिन क्रमशः इन नौ देवियों की पूजा होती है।#नवदुर्गा#9 देवी#नाम
नवरात्रि विधिनवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?नवरात्रि कलश स्थापना: प्रतिपदा को ईशान कोण में चौकी पर मिट्टी में जौ बोएं, तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी भरें, आम के 5 पत्ते लगाएं, नारियल रखें। स्थापना मंत्र बोलें और देवी का आवाहन करें। नवमी को विसर्जन।#कलश स्थापना#नवरात्रि#घट स्थापना
पाठ विधिदुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें?दुर्गा सप्तशती पाठ का क्रम: कवच → अर्गला → कीलक → नवार्ण मंत्र (108 बार) → तीन चरित्र (13 अध्याय) → उपसंहार → आरती। नवरात्रि में 9 दिन में 13 अध्याय विभाजित करें। पूर्व या उत्तर मुख, लाल आसन, स्नान करके पाठ करें।#दुर्गा सप्तशती#पाठ विधि#13 अध्याय
साधना समयतंत्र साधना कब करनी चाहिए?तंत्र साधना के लिए ब्रह्ममुहूर्त (सात्विक तंत्र), प्रदोष काल (शिव-शक्ति) और मध्यरात्रि (उग्र तंत्र) शुभ हैं। अमावस्या तांत्रिक साधना की प्रमुख तिथि है। नवरात्रि और दीपावली वार्षिक महाकाल हैं। ग्रहण काल केवल सिद्ध तांत्रिकों के लिए है।#तंत्र समय#अमावस्या#रात्रि साधना
पूजा विधिदुर्गा पूजा घर पर कैसे करें?ईशान कोण में देवी प्रतिमा स्थापित करें। आचमन, संकल्प, पंचोपचार पूजन (जल, चंदन, सिंदूर, लाल फूल, भोग), नवार्ण मंत्र जप, देवी सूक्त पाठ और आरती करें। नवरात्रि में अखंड दीप और नवमी को कन्या पूजन अनिवार्य है।#घर पर पूजा#दुर्गा पूजा#विधि
देवी महात्म्यदुर्गा पूजा का महत्व क्या है?दुर्गा पूजा त्रिदेवों की संयुक्त शक्ति का उत्सव है — महिषासुर वध का स्मरण। आध्यात्मिक रूप से यह तमस-रजस-अहंकार का नाश और आंतरिक शक्ति की जागृति है। सप्तशती में कहा गया — शत्रु भय, रोग, दरिद्रता नाश और मोक्ष इसके फल हैं।#दुर्गा पूजा#महत्व#नवरात्रि
नवरात्रि विधिनवरात्रि में कन्या पूजन क्यों किया जाता है?देवी भागवत के अनुसार देवी दुर्गा कुमारी कन्याओं में निवास करती हैं। 2-10 वर्ष की कन्याओं के पाँव धोकर, रोली लगाकर, हलवा-पूरी का भोग देकर और दक्षिणा से उनकी पूजा करें। 9 कन्याओं की पूजा सर्वोत्तम है।#कन्या पूजन#कुमारी पूजा#नवरात्रि
देवी ज्ञाननवदुर्गा के नाम क्या हैं?नवदुर्गा के नाम हैं — 1.शैलपुत्री, 2.ब्रह्मचारिणी, 3.चंद्रघंटा, 4.कूष्मांडा, 5.स्कंदमाता, 6.कात्यायनी, 7.कालरात्रि, 8.महागौरी, 9.सिद्धिदात्री। नवरात्रि के नौ दिन इनकी क्रमशः पूजा की जाती है।#नवदुर्गा#नाम#नौ रूप
नवरात्रि विधिनवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?नवरात्रि प्रतिपदा को जौ बोकर, तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी भरें। पाँच आम पत्ते मुख पर रखें, नारियल ऊपर स्थापित करें। ईशान कोण में रखें और 'ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से स्थापना करें।#कलश स्थापना#नवरात्रि#घट स्थापना