विस्तृत उत्तर
नवचंडी हवन माँ दुर्गा की अत्यन्त प्रभावशाली आराधना है जिसमें नौ दिनों तक प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती (700 श्लोक) का पाठ और उसके दशांश (दसवें भाग) से हवन किया जाता है।
विधि
1तैयारी
- ▸शुभ मुहूर्त (विशेषतः नवरात्रि काल) में आरम्भ करें।
- ▸अनुभवी और विद्वान पण्डित/पुरोहित से करवाएँ — यह अनुष्ठान स्वयं करना कठिन है।
- ▸हवन कुण्ड का पंचभूत संस्कार करें।
2प्रमुख क्रम
- ▸संकल्प: यजमान अपना नाम, गोत्र और उद्देश्य बताकर संकल्प करे।
- ▸गणपति पूजन: सर्वप्रथम विघ्नहर्ता गणेश का पूजन।
- ▸कलश स्थापना एवं नवग्रह पूजन।
- ▸नौ दिन प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का सम्पूर्ण पाठ।
- ▸प्रत्येक दिन पाठ के दशांश (1/10) मंत्रों से हवन — प्रत्येक मंत्र के पश्चात् 'स्वाहा' बोलकर आहुति।
- ▸नवार्ण मंत्र ('ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे') का जप।
- ▸प्रतिदिन कुमारी पूजन (एक कुमारी या बढ़ते क्रम में)।
- ▸नवमी या अन्तिम दिन पूर्णाहुति हवन।
3सामग्री
हवन सामग्री (तिल, जौ, घी, चावल, गुग्गुल, कमलगट्टा आदि), लाल पुष्प, नारियल, सुपारी, पान, लाल वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फल-मिठाई।
4अवधि
सामान्यतः 1 से 9 दिन — परम्परानुसार 9 दिन का अनुष्ठान सर्वोत्तम। कुछ स्थानों पर 1-3 दिन में भी सम्पन्न किया जाता है।
फल
पितृ दोष, ग्रह दोष निवारण, शत्रु भय नाश, रोग निवारण, मनोकामना पूर्ति, और माँ दुर्गा की विशेष कृपा।
ध्यान रखें: यह विस्तृत अनुष्ठान है, अनुभवी कर्मकाण्डी पण्डित से ही करवाएँ।





