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हवन एवं यज्ञ📜 चण्डी विधान, मार्कण्डेय पुराण, सनातन संस्था2 मिनट पठन

सहस्रचंडी हवन कैसे और कहाँ करवाएं

संक्षिप्त उत्तर

सहस्रचंडी = 100 ब्राह्मणों द्वारा सप्तशती के 1,000 पाठ + दशांश हवन। 9-11 दिन। उद्देश्य: राष्ट्र संकट, महामारी, महाभय निवारण। कहाँ: शक्तिपीठ (विन्ध्यवासिनी, कामाख्या), तीर्थ (काशी, प्रयाग, हरिद्वार)। सामूहिक/संस्थागत अनुष्ठान — 100 पण्डित आवश्यक। इससे बड़ा: लक्षचंडी (1,00,000 पाठ)।

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विस्तृत उत्तर

सहस्रचंडी अत्यन्त विशाल और दुर्लभ अनुष्ठान है जिसमें दुर्गा सप्तशती के एक हजार (1,000) पाठ किए जाते हैं।

विधान

  • 100 ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती के 1,000 पाठ।
  • प्रत्येक पाठ संपुटित (नवार्ण मंत्र 100-100 बार आदि-अन्त में)।
  • पाठ पूर्ण होने पर दशांश हवन।
  • अवधि: सामान्यतः 9-11 दिन (100 पण्डित × प्रतिदिन ~1 पाठ = 10 दिन + हवन)।

उद्देश्य

शास्त्रों में सहस्रचंडी का विधान अत्यन्त गम्भीर स्थितियों में है:

  • राज्यनाश/राष्ट्र संकट
  • महाउत्पात/प्राकृतिक आपदा
  • महामारी
  • शत्रुभय
  • महारोग
  • सामूहिक कल्याण

कहाँ करवाएं

  • शक्तिपीठ या देवी मन्दिरों में — विन्ध्यवासिनी, वैष्णो देवी, कामाख्या, कालीघाट।
  • प्रसिद्ध तीर्थस्थल — प्रयागराज, काशी, हरिद्वार, उज्जैन।
  • त्र्यम्बकेश्वर, नासिक में भी यह अनुष्ठान होता है।
  • बड़े मठ और आश्रम (शंकराचार्य मठ, रामकृष्ण मिशन आदि) में भी कभी-कभी आयोजित।

व्यावहारिक बातें

  • 100 विद्वान ब्राह्मणों की आवश्यकता — अतः यह व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक/संस्थागत अनुष्ठान है।
  • अत्यधिक खर्चीला और जटिल।
  • विश्वसनीय धार्मिक संस्था या मन्दिर ट्रस्ट के माध्यम से करवाएँ।

इससे बड़ा

लक्षचंडी = 1,00,000 पाठ — अत्यन्त दुर्लभ, कई मासों/वर्षों में पूर्ण।

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शास्त्रीय स्रोत
चण्डी विधान, मार्कण्डेय पुराण, सनातन संस्था
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