विस्तृत उत्तर
सहस्रचंडी अत्यन्त विशाल और दुर्लभ अनुष्ठान है जिसमें दुर्गा सप्तशती के एक हजार (1,000) पाठ किए जाते हैं।
विधान
- ▸100 ब्राह्मणों द्वारा दुर्गा सप्तशती के 1,000 पाठ।
- ▸प्रत्येक पाठ संपुटित (नवार्ण मंत्र 100-100 बार आदि-अन्त में)।
- ▸पाठ पूर्ण होने पर दशांश हवन।
- ▸अवधि: सामान्यतः 9-11 दिन (100 पण्डित × प्रतिदिन ~1 पाठ = 10 दिन + हवन)।
उद्देश्य
शास्त्रों में सहस्रचंडी का विधान अत्यन्त गम्भीर स्थितियों में है:
- ▸राज्यनाश/राष्ट्र संकट
- ▸महाउत्पात/प्राकृतिक आपदा
- ▸महामारी
- ▸शत्रुभय
- ▸महारोग
- ▸सामूहिक कल्याण
कहाँ करवाएं
- ▸शक्तिपीठ या देवी मन्दिरों में — विन्ध्यवासिनी, वैष्णो देवी, कामाख्या, कालीघाट।
- ▸प्रसिद्ध तीर्थस्थल — प्रयागराज, काशी, हरिद्वार, उज्जैन।
- ▸त्र्यम्बकेश्वर, नासिक में भी यह अनुष्ठान होता है।
- ▸बड़े मठ और आश्रम (शंकराचार्य मठ, रामकृष्ण मिशन आदि) में भी कभी-कभी आयोजित।
व्यावहारिक बातें
- ▸100 विद्वान ब्राह्मणों की आवश्यकता — अतः यह व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक/संस्थागत अनुष्ठान है।
- ▸अत्यधिक खर्चीला और जटिल।
- ▸विश्वसनीय धार्मिक संस्था या मन्दिर ट्रस्ट के माध्यम से करवाएँ।
इससे बड़ा
लक्षचंडी = 1,00,000 पाठ — अत्यन्त दुर्लभ, कई मासों/वर्षों में पूर्ण।





