विस्तृत उत्तर
यज्ञ में ऋत्विजों (पुरोहितों) की संख्या यज्ञ के प्रकार पर निर्भर करती है। श्रौत (वैदिक) यज्ञों में यह संख्या निश्चित है।
यज्ञ अनुसार ऋत्विज् संख्या
1. अग्निहोत्र (दैनिक होम): 1 ऋत्विज्
2. दर्श-पौर्णमास इष्टि (अमावस्या-पूर्णिमा यज्ञ): 4 ऋत्विज्
- ▸अध्वर्यु (यजुर्वेद — कर्म प्रधान)
- ▸होता (ऋग्वेद — मंत्र पाठ)
- ▸ब्रह्मा (अथर्ववेद — समग्र निरीक्षण)
- ▸आग्नीध्र (अग्नि सम्भालने वाला)
3. चातुर्मास्य याग: 5 ऋत्विज् (उपरोक्त 4 + प्रतिप्रस्थाता)
4. पशुबन्ध याग: 6 ऋत्विज् (+ मैत्रावरुण)
5. अग्न्याधान (अग्निहोत्र ग्रहण): 4-5 ऋत्विज्
6. सोमयाग (अग्निष्टोम आदि): 16 ऋत्विज् — चार वेदों के 4-4 प्रतिनिधि:
- ▸ऋग्वेद: होता, मैत्रावरुण, अच्छावाक, ग्रावस्तुत
- ▸यजुर्वेद: अध्वर्यु, प्रतिप्रस्थाता, नेष्टा, उन्नेता
- ▸सामवेद: उद्गाता, प्रस्तोता, प्रतिहर्ता, सुब्रह्मण्य
- ▸अथर्ववेद: ब्रह्मा, ब्राह्मणाच्छंसी, आग्नीध्र, पोता
7. सामान्य गृह्य हवन (पौराणिक पद्धति): 1 पुरोहित पर्याप्त।
8. नवचंडी/शतचंडी जैसे बड़े अनुष्ठान: 5-11 या अधिक पण्डित।
सारांश: दैनिक हवन में 1 पुरोहित या स्वयं यजमान पर्याप्त। बड़े श्रौत यज्ञों में 4 से 16 तक। विशेष अनुष्ठानों में आवश्यकतानुसार।





