तीर्थ विधितीर्थ स्थल पर पुरोहित से पूजा करवाना जरूरी क्या?जरूरी नहीं — भगवान भाव देखते(गीता)। स्वयं प्रार्थना=दिखावा पूजा से अधिक। पुरोहित सहायक(वैदिक मंत्र/विधि)। ज़बरदस्ती/भय दिखाने वालों से बचें। श्राद्ध/पिंडदान=पुरोहित, सामान्य दर्शन=स्वयं।#पुरोहित#पूजा#जरूरी
मरणोपरांत आत्मा यात्राएकादशी श्राद्ध का दोष क्या बताया गया है?एकादशी श्राद्ध से कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों नरकगामी बताए गए हैं।#एकादशी श्राद्ध#दोष#नरकगामी
गुरु की अनिवार्यताप्राण प्रतिष्ठा का अधिकार किसे है?प्राण प्रतिष्ठा का अधिकार केवल उस साधक या पुरोहित को है जिसने योग्य गुरु से दीक्षा प्राप्त की हो और जो उस मंत्र की जीवंत ऊर्जा को धारण करता हो।#प्राण प्रतिष्ठा अधिकार#दीक्षित साधक#पुरोहित
हवन एवं यज्ञयज्ञ करवाने के लिए कितने पुरोहित चाहिएयज्ञ अनुसार ऋत्विज् संख्या: अग्निहोत्र = 1, दर्श-पौर्णमास = 4 (अध्वर्यु, होता, ब्रह्मा, आग्नीध्र), चातुर्मास्य = 5, पशुबन्ध = 6, सोमयाग = 16 (चार वेदों के 4-4)। सामान्य गृह्य हवन = 1 पुरोहित या स्वयं यजमान। बड़े अनुष्ठान (नवचंडी आदि) = 5-11+।#ऋत्विज#पुरोहित#यज्ञ