विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत के चतुर्थ स्कन्ध में महाराज पृथु के सौ अश्वमेध यज्ञों का प्रसंग है। जब महाराज पृथु यज्ञ कर रहे थे तब भगवान विष्णु वहाँ साक्षात प्रकट हुए। भगवान के साथ केवल बैकुंठ के पार्षद ही नहीं बल्कि भुवर्लोक के निवासी — सिद्धलोक और विद्याधरलोक के वासी — भी वहाँ उपस्थित हुए। साथ ही यक्ष और राक्षस भी वहाँ आए। यह प्रसंग दर्शाता है कि देवों के अतिरिक्त भुवर्लोक की ये मध्यवर्ती सत्ताएं भी भगवान के महान आयोजनों में सम्मिलित होने का पूर्ण अधिकार रखती हैं। यह यह भी प्रमाणित करता है कि भुवर्लोक के निवासी भूलोक की घटनाओं से निरंतर जुड़े रहते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





