विस्तृत उत्तर
स्वर्लोक की प्राप्ति किसी भी आत्मा के लिए स्वतः या सहज नहीं होती। गरुड़ पुराण और अन्य स्मृतियों में उन विशिष्ट कर्मों का वर्णन है जिनके माध्यम से स्वर्लोक प्राप्त होता है। जो व्यक्ति धर्मशास्त्रों के अनुसार आचरण करते हैं, जिन्होंने प्यासों के लिए कुएं और तालाब खुदवाए हैं और विशेषकर ब्राह्मणों को भूमि, गौ (गाय) और तिल का दान किया है उनके लिए यमलोक का मार्ग सुलभ और बाधारहित हो जाता है। गरुड़ पुराण स्पष्ट करता है कि तिल और गौ का दान मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट कर देता है और यह सीधे स्वर्ग का द्वार खोल देता है। महान यज्ञों और वैदिक अनुष्ठानों से भी स्वर्ग मिलता है। मृत्यु के समय भगवान विष्णु के दस अवतारों का स्मरण या भगवान के नाम का उच्चारण भी स्वर्ग प्राप्ति में सहायक है। इन सभी उद्यानों के सभी द्वीपों में रहने वाले लोग स्वर्ग के द्वार पर वैदिक अनुष्ठान करते हैं।
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