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श्रौत से जुड़े सभी प्रश्न(4)

श्रौत पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

धर्म और आचार

श्रौत और स्मार्त में क्या अंतर है?

वेदश्रवण और वेदविहित यज्ञ से श्रौत, तथा शास्त्रार्थ-स्मरण और वर्णाश्रम नियम पालन से स्मार्त कहा गया है।

#श्रौत#स्मार्त#वेद
वेद एवं यज्ञ

अतिरात्र यज्ञ का क्या विधान है

अतिरात्र = रात भर चलने वाला सोमयाग (7 प्रकारों में छठवाँ)। विशेषता: चौथा सवन (रात्रि), अश्विनीकुमार ग्रह (भोर में)। 16 ऋत्विज्। 1975 और 2011 में केरल में सम्पन्न — Frits Staal द्वारा documented। आज अत्यन्त दुर्लभ — केवल केरल नम्बूदिरी परम्परा में जीवित।

#अतिरात्र#सोमयाग#वैदिक यज्ञ
हवन एवं यज्ञ

यज्ञ करवाने के लिए कितने पुरोहित चाहिए

यज्ञ अनुसार ऋत्विज् संख्या: अग्निहोत्र = 1, दर्श-पौर्णमास = 4 (अध्वर्यु, होता, ब्रह्मा, आग्नीध्र), चातुर्मास्य = 5, पशुबन्ध = 6, सोमयाग = 16 (चार वेदों के 4-4)। सामान्य गृह्य हवन = 1 पुरोहित या स्वयं यजमान। बड़े अनुष्ठान (नवचंडी आदि) = 5-11+।

#ऋत्विज#पुरोहित#यज्ञ
हवन एवं यज्ञ

सोमयाग क्या है और कैसे किया जाता है

सोमयाग = सोमरस से आहुति वाला श्रेष्ठ वैदिक यज्ञ। 7 प्रकार: अग्निष्टोम सबसे मूल। 16 ऋत्विज्, वसन्त ऋतु में। क्रम: दीक्षा → सोम क्रय → सोमरस निष्कासन (तीन सवन) → सामगान → आहुति → सोमपान → दक्षिणा → अवभृथ स्नान। राजसूय, अश्वमेध भी सोमयाग श्रेणी। आज अत्यन्त दुर्लभ।

#सोमयाग#अग्निष्टोम#वैदिक यज्ञ
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