विस्तृत उत्तर
शतचंडी हवन में दुर्गा सप्तशती के सौ (100) पाठ किए जाते हैं। यह नवचंडी से बड़ा और अत्यन्त प्रभावशाली अनुष्ठान है।
अवधि
शतचंडी सामान्यतः 5 दिनों में पूर्ण होती है:
- ▸पहले दिन: एक पाठ
- ▸दूसरे दिन: दो पाठ
- ▸तीसरे दिन: तीन पाठ
- ▸चौथे दिन: चार पाठ
(इस प्रकार 10 ब्राह्मणों द्वारा बढ़ते क्रम में पाठ करने पर 4 दिनों में 100 पाठ पूर्ण होते हैं।)
- ▸पाँचवें दिन: दशांश हवन (पूर्णाहुति)
विशेष नियम
- ▸न्यूनतम 10 विद्वान ब्राह्मण पाठ करते हैं।
- ▸प्रत्येक पाठ के आद्यन्त (आरम्भ और अन्त) में नवार्ण मंत्र का 100-100 बार जप — इसे 'संपुटित पाठ' कहते हैं।
- ▸पूर्णाहुति दिवस पर विशाल हवन होता है।
उद्देश्य
राज्यनाश, महाउत्पात, महाभय, महामारी, शत्रुभय, रोगभय आदि गम्भीर संकटों के निवारण हेतु।
इससे बड़े अनुष्ठान
- ▸सहस्रचंडी: 100 ब्राह्मणों द्वारा 1,000 पाठ।
- ▸लक्षचंडी: 1,00,000 पाठ — अत्यन्त दुर्लभ अनुष्ठान।





