विस्तृत उत्तर
यद्यपि आराध्य देवी एक ही हैं, परन्तु दोनों में मौलिक अंतर हैं। 1. कालावधि: मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है, जबकि महाष्टमी वर्ष में मुख्य रूप से दो बार (शारदीय और चैत्र) आती है। 2. स्वरूप: मासिक व्रत 'नित्य' और व्यक्तिगत साधना है जिसकी विधि सरल है, जबकि महाष्टमी एक 'नैमित्तिक' सार्वजनिक महापर्व है जिसकी विधि अत्यंत जटिल है। 3. संधि पूजा: महाष्टमी का प्राण 'संधि पूजा' (अष्टमी-नवमी का मिलन) है, जो मासिक व्रत में अनिवार्य नहीं है। 4. कुमारी पूजन: मासिक व्रत में 1-9 कन्याओं का पूजन स्वैच्छिक है, जबकि महाष्टमी पर नवदुर्गा के रूप में 9 कन्याओं का पूजन अनिवार्य माना जाता है।





