विस्तृत उत्तर
इस नव-दिवसीय अनुष्ठान का परम लक्ष्य केवल भौतिक सुख नहीं है। कलश और अखण्ड ज्योति की ऊर्जा के सान्निध्य में जब नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का जप किया जाता है, तो साधक की मूलाधार में सुप्त कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होकर षट्चक्रों का भेदन करती है।
यह अनुष्ठान चेतना का ऊर्ध्वरोहण करता है। देवी माहात्म्य के श्रवण और पठन से साधक को देवी-लोक की प्राप्ति होती है और अंततः वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर परब्रह्म स्वरूपा माता के श्रीचरणों में 'मोक्ष' प्राप्त करता है।





