विस्तृत उत्तर
ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड में स्वयं नारायण मुनि ने सरस्वती पूजा के अभूतपूर्व परिणामों का उल्लेख किया है।
अज्ञानता का समूल नाश: माता सरस्वती 'निःशेषजाड्यापहा' हैं, अर्थात वे जड़ता, आलस्य और मूर्खता का पूर्ण रूप से नाश करती हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण उद्घोष करता है कि माता की कृपा से एक अत्यंत अज्ञानी व्यक्ति भी महान विद्वान और शास्त्रों का ज्ञाता बन सकता है।
चूँकि देवी सरस्वती परमेश्वर की अंतरंग शक्ति हैं, अतः उनकी विशुद्ध भक्ति व्यक्ति को केवल लौकिक (भौतिक) ज्ञान ही नहीं, अपितु 'परा विद्या' (अध्यात्म ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार) भी प्रदान करती है। साधक को जीवन में धन, विद्या, गुणवान संतति और अंततः भगवत्-प्राप्ति होती है।
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