विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती, देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण के अनुसार, जो साधक शास्त्रोक्त और तांत्रिक विधि से कलश स्थापना कर पूर्ण निष्काम या सकाम भाव से भगवती की आराधना करता है, उसके लिए इस ब्रह्मांड में कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता।
लौकिक और भौतिक लाभ:
— दरिद्रता का समूल नाश होता है।
— धन-धान्य, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की असीमित वर्षा होती है।
— उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घ आयु और मुकदमों में निश्चित विजय।
— जीवन की कठिन से कठिन बाधाओं पर विजय और शत्रुओं का पूर्ण दमन।
पारलौकिक और आध्यात्मिक लाभ:
— नवार्ण मंत्र के जप से कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होकर षट्चक्रों का भेदन।
— देवी माहात्म्य के श्रवण और पठन से साधक को देवी-लोक की प्राप्ति।
— अंततः जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति।





