लौकिक: दरिद्रता नाश, धन-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, मुकदमों में विजय, शत्रु दमन। आध्यात्मिक: कुंडलिनी जागरण, षट्चक्र भेदन, देवी-लोक प्राप्ति, अंततः जन्म-मरण चक्र से मुक्ति और मोक्ष।
- 1दरिद्रता का समूल नाश होता है।
- 2धन-धान्य, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की असीमित वर्षा होती है।
- 3उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घ आयु और मुकदमों में निश्चित विजय।
- 4जीवन की कठिन से कठिन बाधाओं पर विजय और शत्रुओं का पूर्ण दमन।
- 5नवार्ण मंत्र के जप से कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत होकर षट्चक्रों का भेदन।
- 6देवी माहात्म्य के श्रवण और पठन से साधक को देवी-लोक की प्राप्ति।
- 7अंततः जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति।