विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के माहात्म्य खंड में स्वयं सूत जी ने नैमिषारण्य में ऋषियों को शिव पुराण श्रवण का फल विस्तार से बताया है।
पाप नाश — शिव पुराण माहात्म्य में कहा गया है — 'जो मनुष्य पाप, दुराचार तथा काम-क्रोध, मद, लोभ में निरंतर डूबे रहते हैं, वे भी शिव पुराण पढ़ने अथवा सुनने से शुद्ध हो जाते हैं तथा उनके पापों का पूर्णतया नाश हो जाता है।'
चित्त शुद्धि और ज्ञान — 'शिव पुराण की कथा सुनने से चित्त की शुद्धि एवं मन निर्मल हो जाता है। शुद्ध चित्त में ही भगवान शिव और पार्वती का वास होता है। चित्तशुद्धि होने से ज्ञान और वैराग्य के साथ महेश्वर की भक्ति प्रकट होती है।'
भवबंधन से मुक्ति — 'इस पुराण को निःस्वार्थ होकर श्रद्धा से श्रवण करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर इस जीवन में उत्कृष्ट भोगों का उपभोग करके अंत में शिवलोक प्राप्त कर लेता है।' यह कथा 'भवबंधनरूपी रोग का नाश करने वाली' है।
दान का फल — शिव पुराण की पोथी का विधिपूर्वक दान शिव के अनुग्रह से मनुष्य को भवबंधन से मुक्त कर देता है।
शिव पुराण पढ़ने का संदेश — यह ग्रंथ हिन्दू धर्म में 18 पुराणों में सर्वाधिक पठित है। कलियुग के पापकर्म से ग्रसित व्यक्ति के लिए शिव-भक्ति का यह सर्वोत्तम मार्ग है।





