विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण और शिव पुराण के अनुसार, इस पवित्र लिंग के मात्र दर्शन, अभिषेक और नाम-स्मरण से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। मृत्यु के पश्चात साधक आवागमन के चक्र से मुक्त होकर 'शिवलोक' प्राप्त करता है। पूजा के उपरांत सुपात्र को गोदान, अन्न-दान या वस्त्र-दान करने से साधक की योग-साधना निर्विघ्न पूर्ण होती है और लौकिक जीवन में अजेयता व शारीरिक बल प्राप्त होता है।





