विस्तृत उत्तर
दान हिंदू धर्म में पापनाश और पुण्य संचय का प्रमुख उपाय माना गया है।
गीता में दान के तीन प्रकार (17.20-22)
- 1सात्विक दान (17.20) — बिना प्रतिफल की इच्छा, उचित समय, पात्र व्यक्ति को — श्रेष्ठ, पापनाशक।
- 2राजसिक दान (17.21) — प्रत्युपकार या फल की इच्छा से — मध्यम, सीमित फल।
- 3तामसिक दान (17.22) — अपमानपूर्वक, अपात्र को — निकृष्ट, फल नहीं।
दान से पापनाश कैसे
- 1त्याग भाव — दान में लोभ का त्याग होता है — लोभ पाप का मूल कारण है।
- 2पुण्य संचय — दान से पुण्य बढ़ता है जो पूर्व पापों को निष्प्रभावी करता है।
- 3कर्म शुद्धि — निःस्वार्थ दान = निष्काम कर्म = कर्म बंधन से मुक्ति।
सर्वश्रेष्ठ दान
- ▸अन्नदान — 'अन्नदानं परं दानम्' — अन्नदान सबसे बड़ा दान।
- ▸विद्यादान — ज्ञान का दान, शिक्षा देना।
- ▸अभयदान — किसी को भय से मुक्ति दिलाना।
- ▸गो-दान — गरुड़ पुराण में मृत्यु पश्चात गो-दान विशेष महत्वपूर्ण।
ध्यान दें
- ▸दान पाप करने का प्रायश्चित है, पाप करने की छूट नहीं।
- ▸सच्चा दान = सात्विक, निःस्वार्थ, पात्र को, श्रद्धापूर्वक।





