विस्तृत उत्तर
दान-विधान (Dana Vidhi): महामृत्युंजय अनुष्ठान के पूर्ण होने पर संकल्प की पूर्णता हेतु ब्राह्मणों को यथायोग्य दान दिया जाता है। इसमें प्रमुख रूप से गोदान (गाय का दान), स्वर्ण दान, वस्त्र दान और अन्न दान का विधान है।
रोग-निवारण के विशेष मामलों में औषधियों का दान, रोगियों की सेवा, और निर्धनों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी कर्म माना गया है।
अनुष्ठान के पश्चात १३ ब्राह्मणों और कन्याओं को सात्विक भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा देकर ससम्मान विदा किया जाता है।





