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विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में विधान है कि मृत्यु से पूर्व काले या लाल रंग की गाय का सविधि दान करने से जीवात्मा वैतरणी नदी को बिना किसी कष्ट के पार कर लेती है। वैतरणी नदी यमलोक के दक्षिणी द्वार के मार्ग में स्थित है और पापियों के लिए अत्यंत भयानक है। इसमें उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं। जिन्होंने जीवन में गोदान नहीं किया, वे इस नदी में डूबते और उतराते हैं। परंतु जिसने विधिपूर्वक गौदान किया होता है, वह उसी गाय की पूंछ पकड़कर इस भयानक नदी को पार कर लेता है।
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