विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण में यह स्पष्ट और अनेकों बार दोहराया गया है कि दान से पाप नष्ट होते हैं।
गोदान से पाप-नाश — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है — 'गोचर्मप्रमाण भूमि विधानपूर्वक सत्पात्र को देता है, वह ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त होकर पवित्र हो जाता है।' गोदान से 'कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।'
वृषोत्सर्ग से — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में कहा गया है — 'बाल्यावस्था, कौमार, पौगण्ड, यौवन और वृद्धावस्था में किया गया जो पाप है, वह सब वृषोत्सर्ग से नष्ट हो जाता है।'
भूमिदान से — 'राज्यसंचालन में राजा से होने वाला महापाप भी केवल भूमिदान से विलीन होता है।'
स्वर्णदान से — 'देवता, ऋषिगण और धर्मराज के सभासद स्वर्णदान से संतुष्ट होकर वर प्रदान करते हैं।' यह संतुष्टि पाप-भार को कम करती है।
सामान्य दान से — गरुड़ पुराण का मूल संदेश है — 'जल और अन्न का दान भी पाप-नाश करता है।' सामान्य व्यक्ति भी इन्हें करके पाप से मुक्त हो सकता है।
दान पाप का प्रायश्चित नहीं है — यह ध्यान देने योग्य है कि दान पाप-मुक्ति का सहायक है, किंतु जानबूझकर पाप करके दान से मुक्ति का भाव शास्त्र-सम्मत नहीं है।





