विस्तृत उत्तर
दान को पारलौकिक यात्रा का पाथेय इसलिए कहा गया है क्योंकि मृत्यु के समय अथवा एकादशाह और द्वादशाह के कृत्यों में किए गए दानों का आत्मा की यात्रा पर सीधा प्रभाव पड़ता है। गोदान वैतरणी नदी पार करने में सहायक होता है। तिल दान प्रेत के पापों का नाश कर असुरों और दानवों को दूर रखता है। लवण और लौह दान यमराज को प्रसन्न करते हैं। कपास दान भूतों और पिशाचों के खतरे को टालता है। स्वर्ण और धान्य दान परलोक में सुख-समृद्धि देते हैं। भूमि दान नरक की यातनाओं से रक्षा करता है। इसलिए दान केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा की पारलौकिक यात्रा का यात्रा-साधन माना गया है।
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