विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में गोदान का वर्णन अत्यंत विस्तार से किया गया है और इसे सभी दानों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है।
गोदान का अर्थ — गोदान अर्थात् गाय का दान। एक सुलक्षणी, दूध देने वाली, सौम्य स्वभाव की गाय को विधिपूर्वक सुपात्र ब्राह्मण को दान करना 'गोदान' कहलाता है।
वैतरणी के संदर्भ में — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में 'वैतरणी धेनु' का विशेष उल्लेख है। मृत्यु से पहले गोदान करने पर वह गाय वैतरणी नदी के तट पर प्रकट होती है और जीव उसकी पूंछ पकड़कर इस भयावह नदी को पार कर लेता है।
पाप-नाश — गरुड़ पुराण में कहा गया है कि गोदान से 'कई जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।' महाभारत के अनुशासन पर्व में भी कहा गया है — 'श्रेष्ठ गुणों वाली गाय का दान करने से पाप नष्ट हो जाते हैं, ऐसा व्यक्ति नरक नहीं जाता।'
पितर-मोक्ष — अमावस्या को किए गए गोदान से पितरों को मोक्ष मिलता है।
गोदान का फल — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'जो इस विधान से वैतरणी धेनु का दान करता है, वह धर्म मार्ग से धर्मराज की सभा में जाता है।'





