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विस्तृत उत्तर
वैतरणी नदी यममार्ग का सबसे भयंकर अवरोध है, जो यमराज के नगर से ठीक पहले आती है। गरुड़ पुराण के अनुसार इस नदी में जल नहीं, बल्कि रक्त, मवाद और अस्थियों का प्रवाह है। यह नदी भयंकर जल-जीवों, तीखी चोंच वाले पक्षियों और मगरमच्छों से भरी हुई है। पापी आत्मा जब इसके तट पर पहुँचती है, तो नाविक उससे पूछता है कि क्या उसने पृथ्वी पर मृत्यु के समय गोदान किया है। यदि गोदान किया है तो नौका मिलती है; नहीं तो उसे रक्त और मवाद से भरी नदी में तैरकर पार करना पड़ता है।
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