लोकवैतरणी नदी कैसे पार होती है?गोदान और पिण्डदान से वैतरणी नदी पार होती है।#वैतरणी नदी#गोदान#पिण्डदान
लोकवैतरणी नदी पार करने में गोदान कैसे सहायक होता है?गोदान करने वाला जीव वैतरणी नदी को गाय की पूंछ पकड़कर बिना कष्ट पार कर सकता है।#गोदान#वैतरणी नदी#यमलोक
लोकवैतरणी नदी इतनी भयानक क्यों है?वैतरणी भयानक है क्योंकि उसमें जल नहीं, उबलता रक्त, पीब, मज्जा, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं तथा यमदूत पापियों को उसमें धकेलते हैं।#वैतरणी नदी#भयानक नदी#यमलोक
लोकवैतरणी नदी क्या है?वैतरणी यमलोक के मार्ग की १०० योजन चौड़ी भयंकर नदी है, जिसमें पापियों के लिए रक्त, पीब, मूत्र और हड्डियाँ बहती हैं।#वैतरणी नदी#यमलोक#गरुड़ पुराण
मरणोपरांत आत्मा यात्रावैतरणी नदी पार न कर पाने पर आत्मा को क्या होता है?गोदान न होने पर आत्मा वैतरणी में धकेली जाती है और पीड़ा सहते हुए तैरकर पार करती है।#वैतरणी नदी#गोदान#आत्मा कष्ट
मरणोपरांत आत्मा यात्रावैतरणी नदी में कौन-कौन से जीव कष्ट देते हैं?वैतरणी में भयंकर जल-जीव, तीखी चोंच वाले पक्षी, मगरमच्छ और कीड़े-मकोड़े आत्मा को कष्ट देते हैं।#वैतरणी नदी#जल जीव#पक्षी
मरणोपरांत आत्मा यात्रावैतरणी नदी में जल के स्थान पर क्या बहता है?वैतरणी नदी में जल के स्थान पर रक्त, मवाद और अस्थियाँ बहती हैं।#वैतरणी नदी#रक्त#मवाद
मरणोपरांत आत्मा यात्रावैतरणी नदी यमलोक से पहले क्यों आती है?वैतरणी यमराज के नगर से ठीक पहले आने वाला सबसे भयंकर अवरोध है।#वैतरणी नदी#यमलोक#सीमांत
मरणोपरांत आत्मा यात्रावैतरणी नदी क्या है?वैतरणी नदी यमलोक से पहले आने वाली रक्त, मवाद और अस्थियों से भरी भयंकर नदी है।#वैतरणी नदी#यममार्ग#यमलोक
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी में दुर्गंध का वर्णन कैसे किया गया है?वैतरणी नदी रक्त, मांस, मवाद, मल-मूत्र और सड़े-गले पदार्थों से 'दुर्गंधपूर्ण' बताई गई है। केशरूपी सेवार (काई) इसे और दुर्गम बनाती है। यह दुर्गंध पापी जीव के कुकर्मों का प्रतीक है।#वैतरणी नदी#दुर्गंध#गरुड़ पुराण
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी में जल का स्वरूप कैसा बताया गया है?वैतरणी नदी में सामान्य जल नहीं है। इसमें रक्त, मांस, कीचड़, मल-मूत्र, चर्बी, मज्जा और अस्थि मिले हैं। पापी को देखते ही यह 'खौलते घी की भाँति' उबलने लगती है।#वैतरणी नदी#जल#रक्त
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी में जीव को किन-किन प्रकार के जीव काटते हैं?वैतरणी में सूई-मुख कीड़े (शरीर में चुभते हैं), वज्र-चोंच गीध और कौए (नोचते हैं), वज्रदन्त घड़ियाल (पकड़कर खींचते हैं), महाविषधर सर्प-बिच्छू (डसते हैं) और मांसभक्षी पक्षी — ये सभी पापी जीव को कष्ट देते हैं।#वैतरणी नदी#जीव#कीड़े
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी में कौन-कौन से कष्ट होते हैं?वैतरणी में पापी को रक्त-मवाद में डूबना, सूई-मुख कीड़ों का दंश, वज्र-चोंच गीधों का आक्रमण, भंवरों में डूबना-उतराना, घड़ियालों का भय और भूख-प्यास — ये सभी यातनाएँ 34-47 दिन तक सहनी पड़ती हैं।#वैतरणी नदी#कष्ट#यातना
जीवन एवं मृत्युक्या सभी जीव वैतरणी नदी पार कर सकते हैं?सभी जीव वैतरणी पार कर सकते हैं परंतु कर्मों के अनुसार भिन्न अनुभव से। गौदान-दानी को गाय/नाव की सहायता मिलती है। पापी को नाक में कांटा फंसाकर खींचा जाता है और लंबे समय तक यातना भोगनी पड़ती है।#वैतरणी नदी#पार करना#कर्म
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी को कौन पार कराता है?गौदान करने वाले जीव की गाय वैतरणी पर आती है — जीव उसकी पूंछ पकड़कर पार करता है। दान-पुण्य से नाव मिलती है। जिनके पास कोई पुण्य नहीं उन्हें नाक में कांटा फंसाकर यमदूत खींचकर ले जाते हैं।#वैतरणी नदी#गौदान#नाव
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी को पार करना क्यों कठिन होता है?वैतरणी नदी इसलिए कठिन है क्योंकि यह रक्त-मवाद-कीड़ों से भरी है, पापी के पास दान का पुण्य नहीं होता और यह 34-47 दिन की यात्रा है। जिसके पास दान नहीं उसे नाक में कांटा फंसाकर खींचा जाता है।#वैतरणी नदी#पार करना#पाप
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी का स्वरूप कैसा बताया गया है?गरुड़ पुराण के अनुसार वैतरणी नदी रक्त, मांस, कीचड़ से भरी, सौ योजन चौड़ी, सूई-मुख कीड़ों और घड़ियालों से पूर्ण है। पापी को देखकर यह खौलने लगती है। इसके तट हड्डियों से बने हैं और ऊपर वज्र-चोंच वाले गीध मंडराते हैं।#वैतरणी नदी#स्वरूप#भयावह
जीवन एवं मृत्युवैतरणी नदी क्या है?वैतरणी नदी मृत्युलोक और यमलोक के बीच स्थित एक भयावह नदी है जो प्रत्येक जीव को पार करनी होती है। 'वैतरणी' नाम दान (वितरण) से जुड़ा है — जिसने जीवन में दान किया, उसके लिए यह पार करना सुगम होता है।#वैतरणी नदी#यममार्ग#गरुड़ पुराण