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विस्तृत उत्तर
वैतरणी नदी यमराज के नगर से ठीक पहले यममार्ग का सबसे भयंकर अवरोध है। आत्मा 16 मध्यवर्ती पुरियों को पार करने के बाद वैतरणी नदी के तट पर पहुँचती है। यह यमलोक का सीमांत मानी गई है। इस नदी में जल नहीं, बल्कि रक्त, मवाद और अस्थियों का प्रवाह है। गोदान करने वाले को इसे पार करने के लिए नौका मिलती है, पर गोदान न होने पर आत्मा को कष्टपूर्वक इस नदी में धकेल दिया जाता है।
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