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विस्तृत उत्तर
वैतरणी नदी भयंकर जल-जीवों, तीखी चोंच वाले पक्षियों और मगरमच्छों से भरी हुई बताई गई है। इस नदी में जल नहीं, बल्कि रक्त, मवाद और अस्थियों का प्रवाह है। यदि आत्मा ने गोदान नहीं किया होता, तो नाविक उसे नौका देने से अस्वीकार कर देता है और यमदूत उसे खौलते हुए रक्त और मवाद की नदी में धकेल देते हैं। वहाँ उसे कीड़े-मकोड़े और पक्षियों द्वारा नोंचा जाता है और वह अत्यंत पीड़ा के साथ नदी पार करती है।
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