ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

वैतरणी नदी का स्वरूप कैसा बताया गया है?

गरुड़ पुराण के अनुसार वैतरणी नदी रक्त, मांस, कीचड़ से भरी, सौ योजन चौड़ी, सूई-मुख कीड़ों और घड़ियालों से पूर्ण है।

संक्षिप्त उत्तर

गरुड़ पुराण के अनुसार वैतरणी नदी रक्त, मांस, कीचड़ से भरी, सौ योजन चौड़ी, सूई-मुख कीड़ों और घड़ियालों से पूर्ण है। पापी को देखकर यह खौलने लगती है। इसके तट हड्डियों से बने हैं और ऊपर वज्र-चोंच वाले गीध मंडराते हैं।

📖

विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय में वैतरणी नदी का अत्यंत भयावह स्वरूप वर्णित किया गया है। भगवान विष्णु गरुड़ को बताते हैं:

यह नदी रक्त (खून) रूपी जल से परिपूर्ण है। इसमें मांस, कीचड़ और मवाद भरा हुआ है। इसकी आवाज स्वयं भय उत्पन्न करने वाली है। यह नदी सौ योजन चौड़ी बताई गई है। इसके तट हड्डियों के समूह से बने हैं। इसमें सूई के समान मुख वाले भयानक कीड़े भरे हैं। वज्र के समान चोंच वाले बड़े-बड़े गीध हैं। इसमें घड़ियाल और अनेक हिंसक जीव निवास करते हैं। इस नदी में सैकड़ों-हजारों भंवर हैं।

गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि जब पापी जीव इस नदी के पास आता है, तो नदी का जल 'कड़ाह में खौलते घी की तरह' उबलने लगता है — अर्थात् पापी आत्मा को देखकर नदी और भी भयावह रूप धारण कर लेती है।

इस नदी में पड़े पापी जीव 'हे भाई', 'हे पुत्र', 'हे पिता' कहते हुए विलाप करते हैं। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वे रक्त का पान भी करते हैं।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

वैतरणी नदीस्वरूपभयावहगरुड़ पुराण
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वैतरणी नदी का स्वरूप कैसा बताया गया है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको जीवन एवं मृत्यु से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#वैतरणी नदी#स्वरूप#भयावह#गरुड़ पुराण