ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
जीवन एवं मृत्यु⏱ 2 मिनट पठन

वैतरणी नदी में जल का स्वरूप कैसा बताया गया है?

वैतरणी नदी में सामान्य जल नहीं है। इसमें रक्त, मांस, कीचड़, मल-मूत्र, चर्बी, मज्जा और अस्थि मिले हैं।

संक्षिप्त उत्तर

वैतरणी नदी में सामान्य जल नहीं है। इसमें रक्त, मांस, कीचड़, मल-मूत्र, चर्बी, मज्जा और अस्थि मिले हैं। पापी को देखते ही यह 'खौलते घी की भाँति' उबलने लगती है।

📖

विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण के द्वितीय अध्याय में वैतरणी नदी के जल का वर्णन सांसारिक नदियों के जल से बिल्कुल भिन्न है। यह जल पापकर्मों का प्रतिफल है।

रक्त-रूपी जल — गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि वैतरणी नदी 'रक्त रूपी जल से परिपूर्ण है।' इस नदी में सामान्य जल नहीं — रक्त (खून) बहता है।

मांस और कीचड़ — रक्त के अतिरिक्त इसमें मांस और कीचड़ मिला हुआ है। यह नदी 'मांस-कर्दम-संकुल' (मांस और कीचड़ से भरी) बताई गई है।

मल, मूत्र, चर्बी, मज्जा और अस्थि — भारतकोश के अनुसार इस नदी में मल, मूत्र, रक्त, चर्बी, मांस, मज्जा और अस्थि जैसी निकृष्ट वस्तुएँ मिलती हैं।

तप्त (खौलता) जल — यह नदी 'तप्त जल से भरी' है। जब पापी आत्मा इसमें प्रवेश करती है तो यह नदी 'कड़ाह में रखे घृत (घी) की भाँति खौलने' लगती है।

दुर्गंध से युक्त — जल की इस अपवित्र प्रकृति के कारण यह नदी अत्यंत दुर्गंधपूर्ण है।

यह वर्णन उन पापियों के लिए है जिन्होंने जीवन में जल और अन्न का दान नहीं किया। जिसने जल को अपवित्र किया, दूसरों को जल से वंचित किया — उसे यह जल मिलता है।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

वैतरणी नदीजलरक्तगरुड़ पुराण
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वैतरणी नदी में जल का स्वरूप कैसा बताया गया है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको जीवन एवं मृत्यु से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#वैतरणी नदी#जल#रक्त#गरुड़ पुराण