का सरल उत्तर
वैतरणी नदी में सामान्य जल नहीं है। इसमें रक्त, मांस, कीचड़, मल-मूत्र, चर्बी, मज्जा और अस्थि मिले हैं। पापी को देखते ही यह 'खौलते घी की भाँति' उबलने लगती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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