विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी पार कराने के विषय में बहुत स्पष्ट वर्णन है।
गौदान करने वालों के लिए — गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जिसने अपने जीवनकाल में ब्राह्मण को गाय का दान किया हो, मृत्यु के बाद वह गाय वैतरणी के तट पर प्रकट होती है। जीव उसी गाय की पूंछ पकड़कर इस भयावह नदी को सरलता से पार कर लेता है। गाय उसका सहारा बनती है और यातना से बचाती है।
दान-पुण्य करने वालों के लिए — जिन्होंने जीवन में दान किए हों, उनके लिए नाव की व्यवस्था होती है। एक नाविक प्रेत उनसे पूछता है कि उनके पास कौन-सा पुण्य है। दान का पुण्य होने पर वह उन्हें नाव में बैठाकर पार करा देता है।
जिनके पास कोई पुण्य नहीं — उनके नाक में कांटा फंसाकर यमदूत आकाश मार्ग से खींचते हुए ले जाते हैं। यह यातना अत्यंत कष्टकारी है।
इसीलिए शास्त्रों में मृत्यु से पहले या बाद में परिजनों द्वारा गौदान करने का विशेष महत्व बताया गया है।





