विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी की यातनाओं का अत्यंत विस्तृत और भयावह वर्णन मिलता है।
रक्त और मवाद में डुबकी — नदी का जल रक्त, मवाद और कीचड़ से भरा है। पापी इसमें डूबता-उतराता रहता है। पापी को देखते ही नदी का जल खौलने लगता है।
सूई-मुख कीड़ों का दंश — नदी में सूई के समान मुख वाले भयानक कीड़े हैं जो जीव के शरीर को काटते रहते हैं। पिंड से बने सूक्ष्म शरीर को ये कीड़े काटते हैं जिससे जीव मूर्च्छित हो जाता है।
वज्र-चोंच गीधों का आक्रमण — ऊपर से वज्र के समान चोंच वाले गीध झपट्टा मारते हैं।
भंवरों में डूबना — सैकड़ों-हजारों भंवरों में पड़कर पापी पाताल में चला जाता है, क्षण भर में ऊपर आता है। यह चक्र बार-बार होता है।
भूख-प्यास — नदी पार करते समय भूख-प्यास की व्याकुलता बनी रहती है। भूखे पापी रक्त का पान तक करते हैं।
घड़ियालों का भय — नदी में घड़ियाल और अन्य हिंसक जीव हैं।
यह समस्त यातना 34-47 दिनों तक चलती है।




