विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी को पार करना तीन कारणों से कठिन बताया गया है।
पहला कारण — यह नदी स्वयं अत्यंत भयावह है। रक्त, मवाद, कीड़ों और हिंसक जीवों से भरी इस नदी में प्रवेश करना असंभव-सा लगता है। नदी का खौलता जल पापी को जलाता है और कीड़े उसे काटते रहते हैं।
दूसरा कारण — पापी जीव के पास दान-पुण्य का सहारा नहीं होता। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जिसने जीवन में गौदान, अन्नदान या अन्य दान किए हों, उसे इस नदी पर सहायता मिलती है। जिसके पास दान का पुण्य नहीं, उसे नाक में कांटा फंसाकर यमदूत खींचते हुए ले जाते हैं — यह यातना ही इस कठिनाई का प्रमाण है।
तीसरा कारण — यह नदी 34 से 47 दिनों तक पार होती है — इतनी लंबी और कष्टकारी यात्रा। पापी जीव भूखा-प्यासा, पिट-पिटाकर पहले से ही जर्जर है।
इस कठिनाई का संदेश यह है — जीवन में किए गए दान, व्रत और भक्ति ही इस नदी को सहज पार करा सकते हैं। यह गौदान के महत्व का सबसे बड़ा प्रमाण है।



