विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में गोदान और यममार्ग का संबंध अत्यंत प्रत्यक्ष और जीवंत रूप में वर्णित है।
वैतरणी पर गाय का प्रकट होना — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'मृत्यु के बाद गाय वैतरणी नदी के तट पर प्रकट होती है।' जिसने जीवन में गोदान किया हो, उसकी वह गाय वैतरणी पर उसकी प्रतीक्षा करती है। जीव उस गाय की पूंछ पकड़कर इस भयावह नदी को सरलता से पार कर लेता है।
यमदूतों पर प्रभाव — गरुड़ पुराण में वर्णित है — 'जिसने गऊ दान किया होता है, उसे यमलोक के रास्ते में आने वाले कष्टों को नहीं भोगना पड़ता।' यमदूत भी गोदानी के साथ सौम्य व्यवहार करते हैं।
गोदान की प्रार्थना — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में गोदान के समय कही जाने वाली प्रार्थना है — 'यमद्वार के महामार्ग में वैतरणी नदी के पार कराने के लिए आप मेरी प्रतीक्षा करना, आपको नमस्कार है।' यह यममार्ग और गोदान के सीधे संबंध का प्रमाण है।
यममार्ग पर गोदान — 'जो व्यक्ति अन्तकाल में नन्दनन्दन भगवान श्रीकृष्ण के पीछे चलते हैं ऐसी गाय को ब्राह्मणों को दान देता है, वह वैतरणी में नहीं गिरता।' — यह गरुड़ पुराण का वचन है।





