विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में दानों की श्रेणी और उनके महत्व का विस्तृत वर्णन है। इसमें स्पष्ट रूप से गोदान को सर्वश्रेष्ठ दान घोषित किया गया है।
गोदान — सर्वोत्तम — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'हिन्दू धर्म में गोदान को सभी प्रकार के दानों में सबसे पवित्र और श्रेष्ठ दान माना गया है।' गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में गोदान के महत्व को 'वैतरणी नदी पार करने का साधन' बताया गया है। 'जिसने गऊ दान किया होता है वो गाय की पूंछ पकड़कर इसे आसानी से पार कर लेता है।'
भूमिदान — दूसरे स्थान पर — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है — 'राज्यसंचालन में राजा से होने वाला महापाप न व्रतों से, न तीर्थ सेवन से और न अन्य किसी दान से नष्ट होता है, अपितु वह तो केवल भूमिदान से ही विलीन होता है।'
स्वर्णदान — 'ब्रह्मा आदि देवता, ऋषिगण तथा धर्मराज के सभासद स्वर्णदान से संतुष्ट होकर वर प्रदान करते हैं।'
वृषोत्सर्ग — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में — 'अग्निहोत्रादि यज्ञों से और विविध दानों से भी वह गति नहीं होती जो वृषोत्सर्ग से प्राप्त होती है।'
संक्षेप में — गरुड़ पुराण की दान-श्रेणी है — गोदान > भूमिदान > स्वर्णदान > अन्नदान > जलदान। किंतु आत्म-ज्ञान और भगवद्-भक्ति इन सबसे परे सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।





