का सरल उत्तर
इसके दर्शन और अभिषेक मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और साधक मृत्यु के पश्चात 'शिवलोक' प्राप्त करता है। पूजा के बाद गोदान या अन्न-दान करने से योग-साधना निर्विघ्न पूर्ण होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।