विस्तृत उत्तर
स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 53) में महर्षि वेदव्यास ने सोमानंदीश्वर लिंग की अत्यंत स्पष्ट फल-श्रुति का उद्घोष किया है:
- 1सोमलोक की प्राप्ति: जो व्यक्ति पूर्ण भक्ति-भाव से इस लिंग का दर्शन करता है, वह मृत्यु के पश्चात् सोमलोक (चंद्रलोक या अमृतलोक) के सर्वोच्च आनंद को प्राप्त करता है और वहीं एकाकार हो जाता है।
- 2महापुण्य: यहाँ की गई एकनिष्ठ आराधना का पुण्य 'सौ गायों के दान' (शत-गोदान) के समतुल्य माना गया है, जो वैदिक परंपरा में एक महादान है।
- 3लौकिक सुख एवं मानसिक शांति: जितेन्द्रिय साधक इस संसार के समस्त अभीष्ट सुखों का भोग करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से, यह तीर्थ अवचेतन मन के अज्ञान, अंधकार और भटकाव को नष्ट कर उसे शीतलता और शिव-आनंद से परिपूर्ण कर देता है।





