स्कंद पुराण के अनुसार नंदीवन स्थित सोमानंदीश्वर लिंग के दर्शन और आराधना का क्या फल प्राप्त होता है?
की चेकलिस्ट
स्कंद पुराण के अनुसार इसके दर्शन और आराधना से 'सौ गायों के दान' (शत-गोदान) के समान पुण्य प्राप्त होता है। साधक लौकिक सुख भोगकर अंततः सोमलोक (चंद्रलोक) के सर्वोच्च आनंद को प्राप्त करता है।
- 1सोमलोक की प्राप्ति: जो व्यक्ति पूर्ण भक्ति-भाव से इस लिंग का दर्शन करता है, वह मृत्यु के पश्चात् सोमलोक (चंद्रलोक या अमृतलोक) के सर्वोच्च आनंद को प्राप्त करता है और वहीं एकाकार हो जाता है।
- 2महापुण्य: यहाँ की गई एकनिष्ठ आराधना का पुण्य 'सौ गायों के दान' (शत-गोदान) के समतुल्य माना गया है, जो वैदिक परंपरा में एक महादान है।
- 3लौकिक सुख एवं मानसिक शांति: जितेन्द्रिय साधक इस संसार के समस्त अभीष्ट सुखों का भोग करता है। मनोवैज्ञानिक रूप से, यह तीर्थ अवचेतन मन के अज्ञान, अंधकार और भटकाव को नष्ट कर उसे शीतलता और शिव-आनंद से परिपूर्ण कर देता है।
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उपासना का फल
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