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विस्तृत उत्तर
माँ की कृपा से साधक के सभी कर्म-बंधन और अज्ञान का नाश होता है, और वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परमानंद को प्राप्त करता है।
माँ त्रिपुर भैरवी की 'नित्य प्रलय' की शक्ति अंततः साधक के अज्ञान, अहंकार और कर्म-संस्कारों का भी 'प्रलय' अर्थात नाश कर देती है, जिससे आत्मा अपने शुद्ध, मुक्त स्वरूप को प्राप्त करती है। यही उनकी साधना का सर्वोच्च वरदान है।
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