विस्तृत उत्तर
भक्त मानते हैं कि दिन का प्रकाश स्वयं कूष्मांडा देवी का प्रत्यक्ष रूप है।
उनका हर रूप प्रकृति के किसी न किसी अंग में देखा जा सकता है।
भक्त जब चौथे नवरात्र को उनका ध्यान करते हैं, तो कहते हैं कि सूर्य में स्थित कूष्मांडा देवी उनके जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को हटा देती हैं और ज्ञान का प्रकाश भरती हैं।
फलतः वे अब पूरे ब्रह्मांड में विस्तारित हो चुकी हैं।
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