विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि देवी कूष्मांडा का निवास स्थान सूर्य लोक है।
वर्तमान मान्यता अनुसार, देवी सदा सूर्य के भीतर-बाहर हर जगह विद्यमान हैं और अपनी ऊर्जा से संपूर्ण ब्रह्माण्ड को आलोकित रखती हैं।
एक अन्य विश्वास के अनुसार, माँ कूष्मांडा अपने सुप्त रूप में वैकुण्ठ में विष्णु भगवान के हृदय में विराजमान थीं और सृष्टि की इच्छा होने पर उन्होंने प्रसन्न मुख से हँसकर ब्रह्माण्ड की रचना की।
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