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विस्तृत उत्तर
लक्ष्मी जी के बिना वैकुण्ठ का ऐश्वर्य और आनंद फीका पड़ गया। कथा में बताया गया है कि श्रीहरि मौन और विरह में चले गए। इसका अर्थ है कि लक्ष्मी, यानी प्रकृति और श्री, के बिना वैभव भी अधूरा हो जाता है।
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