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विस्तृत उत्तर
भस्मासुर से बचने के लिए शिव जी पृथ्वी, आकाश और देव-लोकों में दौड़े। भस्मासुर उनके पीछे-पीछे हाथ फैलाए भाग रहा था ताकि उनके सिर पर हाथ रख सके। शिव जी स्वर्ग, महर्लोक, जनलोक, तपलोक और ब्रह्मलोक तक गए, लेकिन कोई भी देवता उस वरदान के भय से हस्तक्षेप न कर सका। अंततः शिव जी भगवान विष्णु की शरण की ओर गए। विष्णु जी ने वैकुण्ठ से ही पूरी स्थिति समझ ली और अपनी योगमाया से समाधान किया। इसलिए यह कथा दिखाती है कि हरि और हर एक-दूसरे के रक्षक और अभिन्न हैं।
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