विस्तृत उत्तर
वैकुण्ठ में भगवान विष्णु शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए शेषनाग के परम सिंहासन पर विराजते हैं। वे श्रीवत्स और कौस्तुभ मणि से सुशोभित हैं।
वैकुण्ठ में विष्णु कैसे विराजते हैं को संदर्भ सहित समझें
वैकुण्ठ में विष्णु कैसे विराजते हैं का सबसे सीधा सार यह है: विष्णु शंख, चक्र, गदा, पद्म सहित शेषनाग पर विराजते हैं।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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महर्लोक के अधिपति देव कौन हैं?
महर्लोक के अधिपति यज्ञेश्वर हैं जो स्वयं भगवान विष्णु का यज्ञ-स्वरूप है। यज्ञो वै विष्णुः — यज्ञ और विष्णु एक ही हैं।
शाल्मल द्वीप में गरुड़ का क्या महत्व है?
शाल्मल द्वीप में विशाल शाल्मली वृक्ष पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव का निवास है। यहाँ के निवासी चंद्र देव की पूजा करते हैं।
लोकालोक पर्वत का ब्रह्मांडीय महत्व क्या है?
लोकालोक पर्वत भूलोक की अंतिम भौतिक सीमा है जो प्रकाश और अंधकार को विभाजित करती है। यहाँ स्वयं भगवान विष्णु शंख-चक्र-गदा-पद्म धारण किए लोकों की रक्षा हेतु निवास करते हैं।
शाल्मलि द्वीप में गरुड़ देव का क्या महत्व है?
शाल्मलि द्वीप में विशाल शाल्मलि वृक्ष पर गरुड़ देव निवास करते हैं और वहाँ से भगवान विष्णु की वेदमयी स्तुति करते हैं। यहाँ के निवासी चंद्र देव की पूजा करते हैं।
नरसिंह मंत्र का जप शत्रु निवारण के लिए कैसे करें?
'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं...' / 'ॐ क्ष्रौं नृसिंहाय नमः'। मंगलवार/शनिवार, संध्या, 108/1008। शत्रु भय, कोर्ट विजय, अभय। हिरण्यकशिपु वध = अत्याचार नाश।
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