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विस्तृत उत्तर
वैकुण्ठ को नित्य और शाश्वत धाम माना गया है, जो भौतिक प्रकृति के तीन गुणों से परे है। महाप्रलय भौतिक जगत, लोकों और तत्वों पर लागू होता है, लेकिन वैकुण्ठ उस परिवर्तनशील व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। वह भगवान का पारलौकिक धाम है। इसलिए सृष्टि बनती और मिटती रहती है, पर वैकुण्ठ अक्षुण्ण और दिव्य बना रहता है।
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