विस्तृत उत्तर
दुर्वासा वैकुण्ठ इसलिए गए क्योंकि ब्रह्मा और शिव दोनों ने सुदर्शन चक्र से उनकी रक्षा करने में असमर्थता बता दी थी। सुदर्शन चक्र उनका पीछा कर रहा था और उसकी अग्नि से दुर्वासा भयभीत और पीड़ित थे। उन्हें समझ आ गया कि यह भगवान विष्णु का अस्त्र है, इसलिए अंतिम शरण स्वयं विष्णु ही हैं। वैकुण्ठ पहुँचकर वे भगवान नारायण के चरणों में गिर पड़े और क्षमा माँगी। पर भगवान ने भी कहा कि वे अपने भक्तों के अधीन हैं। दुर्वासा को अम्बरीष से क्षमा माँगने के लिए पृथ्वी पर लौटना पड़ा।
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